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स्वतंत्रता सेनानी रेशमलाल जांगड़े पुण्यतिथि: मोहन बंजारे ने किया नमन, नाम से संस्थान की मांग

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पलारी, 10 अगस्त 2025: प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के प्रदेश महासचिव मोहन बंजारे ने अविभाजित मध्यप्रदेश के पहले सांसद, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक स्व. रेशमलाल जांगड़े को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि जांगड़े जी सतनामी समाज के गौरव थे।
जीवन और संघर्ष:
रेशमलाल जांगड़े का जन्म 15 फरवरी 1925 को बिलाईगढ़ के परसाडीह गाँव में हुआ था। देश प्रेम की भावना से प्रेरित होकर, उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और जेल गए। उन्होंने नागपुर लॉ कॉलेज से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की और सतनामी समाज के पहले विधि स्नातक बने।
राजनीतिक और सामाजिक योगदान:
* सांसद और विधायक: 1950 से 1952 तक वह देश की अंतरिम संसद के सदस्य रहे। इसके बाद, वह सात बार सांसद और तीन बार विधायक चुने गए।
* अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग: उन्होंने 1956 में लोकसभा में पहली बार अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग उठाई थी।
* समाज सुधारक: उन्होंने मिनी माता के साथ मिलकर लोकसभा में अस्पृश्यता निवारण बिल पेश किया। उन्होंने समाज के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए 50 से अधिक छात्रावास चलाए।
* गिरौदपुरी मेला: गिरौदपुरी मेले की शुरुआत करने और उसके विकास में उनका अमूल्य योगदान रहा।
सम्मान और उपेक्षा:
मोहन बंजारे ने कहा कि जांगड़े जी ने अपना पूरा जीवन समाज सेवा में समर्पित कर दिया, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके सम्मान में किसी संस्थान का नामकरण नहीं किया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जांगड़े जी के जीवन संघर्षों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए और उनके नाम पर कॉलेज, अस्पताल या जलाशय का नामकरण कर उन्हें सम्मान दिया जाए।
2010 में उन्हें गुरु घासीदास दलित चेतना राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया था, और 2013 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी उन्हें सम्मानित किया था। 11 अगस्त 2024 को उनका निधन हो गया था। मोहन बंजारे ने उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी।

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