अमसेना/आरंग, 15 जनवरी 2026 – राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना की 150वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर आज गुरु घासीदास जी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अमसेना (विकासखंड आरंग) में भव्य सामूहिक गायन और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गौरवशाली उत्सव का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध और गर्व की भावना को सुदृढ़ करना रहा।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अनुपम उदाहरण
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति गीतों पर दी गई मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। इसके पश्चात, पूरे विद्यालय परिवार और ग्राम के गणमान्य नागरिकों ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया।
संस्था के प्राचार्य डॉ. दिलीप झा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए इस गीत के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि:
* ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिमचंद्र चटोपाध्याय द्वारा की गई थी।
* इसे 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ से लिया गया था।
* 1950 में संविधान सभा द्वारा इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया।
डॉ. झा ने कहा कि यह गीत हमारे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है और युवाओं को राष्ट्र निर्माताओं से प्रेरणा लेनी चाहिए।
प्रमुख उद्बोधन: एकता और बलिदान का प्रतीक
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित ग्राम पंचायत अमसेना के सरपंच श्री भोजराम साहू ने कहा कि वंदे मातरम् हमें एकता, शांति और समृद्धि की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
शाला विकास प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री राजकुमार ओगरे ने भावुक उद्बोधन देते हुए कहा:
> “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय के हृदय में बहने वाला वह भाव है, जो हमें हमारे अमर शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है।”
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समिति की सदस्य श्रीमती इंदिरा ढीढी ने ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष के साथ विद्यार्थियों को देश के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। विद्यालय की छात्रा कु. सारिका साहू ने वंदे मातरम् संदेश का प्रभावी वाचन किया।
उपस्थित गणमान्य जन
कार्यक्रम का सफल संचालन व्यायाम शिक्षक भोजराम मनहरे द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
* जनप्रतिनिधि: भोजराम साहू (सरपंच), राजकुमार ओगरे (अध्यक्ष, SMC), मालिक राम टंडन, चंद्रमणि राय (उपसरपंच प्रतिनिधि), और श्यामगीर साहू (पंच)।
* अन्य सदस्य: ज्ञानेश्वर साहू, टीकालाल ढीढी, इंदिरा ढीढी, पुष्पा साहू, और भुनेश्वरी ध्रुव।
इस अवसर पर विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे, जिन्होंने पूरे उत्साह के साथ राष्ट्रीय गौरव के इस उत्सव को मनाया।

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