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अमसेना हायर सेकेंडरी स्कूल में शाला प्रवेशोत्सव की धूम: नवप्रवेशी छात्रों का तिलक और मिठाई से हुआ स्वागत, बांटे गए निःशुल्क गणवेश व पुस्तकें

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अमसेना, 20 जून 2026 – नवीन शैक्षणिक सत्र 2026–27 के पावन शुभारंभ के अवसर पर गुरु घासीदास जी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अमसेना (विकासखंड आरंग) में ‘शाला प्रवेशोत्सव’ का आयोजन बेहद हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ किया गया। विद्यालय प्रांगण में कदम रखते ही नए विद्यार्थियों का स्वागत एक उत्सव की तरह किया गया, जिससे पूरा परिसर बच्चों की किलकारियों और उत्साह से गूंज उठा।

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मां सरस्वती की वंदना से हुआ सत्र का आगाज


कार्यक्रम का गरिमामयी शुभारंभ ज्ञान की देवी मां सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर और पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इसके पश्चात, स्कूल में पहली बार प्रवेश ले रहे नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का अतिथियों द्वारा पारंपरिक रूप से गुलाल लगाकर और मिठाई खिलाकर आत्मीय स्वागत किया गया।


चेहरों पर बिखरी मुस्कान


स्वागत के तुरंत बाद शासन की मंशानुरूप छात्र-छात्राओं को निःशुल्क गणवेश (यूनिफॉर्म) एवं पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। नए सत्र के पहले ही दिन चमचमाती किताबें और नई ड्रेस पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।


“शिक्षा जीवन गढ़ने का मंच है” – राजेश्वरी डहरिया


समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनपद सदस्य (आरंग) श्रीमती राजेश्वरी डहरिया ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए शिक्षा के गूढ़ महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

“शिक्षा केवल किताबी अध्ययन या डिग्रियां हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के संपूर्ण जीवन को गढ़ने और उन्हें बेहतर इंसान बनाने का मंच है। संसार में गुरु से बढ़कर कोई नहीं होता, और एक शिक्षक ही वह सच्चा गुरु है जो हमें अच्छे और बुरे का भेद सिखाता है।”


उन्होंने युवाओं को पढ़ाई को ही अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाने की नसीहत दी। साथ ही, उन्होंने छात्र-छात्राओं को नशापान, सामाजिक बुराइयों और बाह्य आडंबरों से पूरी तरह दूर रहने का संकल्प दिलाया।


सर्वांगीण विकास के लिए खेल भी जरूरी – राजा डहरिया


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ग्रामीण सभा के अध्यक्ष श्री राजा डहरिया ने शिक्षा के मूल उद्देश्यों को रेखांकित किया। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे जीवन में एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और उसे पाने के लिए निरंतर कड़ा परिश्रम करें।


भाषण के मुख्य बिंदु:

पढ़ाई के साथ खेल: उन्होंने कहा कि केवल किताबी कीड़ा बनने के बजाय बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद और अन्य पाठ्येतर गतिविधियों (Co-curricular activities) में शामिल होना बेहद जरूरी है।

मदद का भरोसा: उन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई लिखाई और स्कूल की व्यवस्थाओं में हर संभव सहयोग देने का पूरा आश्वासन दिया।


प्राचार्य ने गिनाईं उपलब्धियां, सकारात्मक माहौल का दिया भरोसा


संस्था के प्राचार्य डॉ. दिलीप झा ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, जनप्रधिनिधियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यालय के विकास क्रम और पिछले सत्रों की शानदार शैक्षणिक उपलब्धियों (शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम) की जानकारी साझा की। डॉ. झा ने आश्वस्त किया कि शाला परिवार बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाने और एक सकारात्मक, सुरक्षित व बेहतरीन माहौल में उन्हें ज्ञान से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिज्ञाबद्ध है।


गरिमामयी उपस्थिति


इस पूरे मांगलिक कार्यक्रम का सफल और जीवंत मंच संचालन व्यायाम शिक्षक भोजराम मनहरे द्वारा किया गया। इस अवसर पर संतरा धृतलहरे, श्रवण बेलदार सहित विद्यालय के सभी सम्मानीय शिक्षक-शिक्षिकाएं, नवप्रवेशित छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।