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सूरजपुर में ‘बालिका सुरक्षा माह’ शुरू, छात्राओं को पॉक्सो एक्ट की जानकारी दी गई

Balika Suraksha Mah Surajpur POCSO Act child rights sexual offenses Women and Child Development Department Chhattisgarh

सूरजपुर, 1 सितंबर 2025 – छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देशानुसार, सूरजपुर जिले में 19 अगस्त से 15 सितंबर तक ‘बालिका सुरक्षा माह’ का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल के तहत, जिले के सरकारी स्कूलों में बालिकाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

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इस अभियान की शुरुआत सूरजपुर विकासखंड के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, केतका से हुई, जहाँ जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने छात्राओं को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) 2012 के बारे में विस्तार से बताया।

पॉक्सो एक्ट क्या है और यह कैसे काम करता है?

पॉक्सो एक्ट का मुख्य उद्देश्य 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और अन्य अपराधों से बचाना है। इसमें यौन अपराधों को परिभाषित किया गया है और अपराधियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। इस एक्ट के तहत, लड़का और लड़की दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।

अधिकारियों ने बताया कि गलत इरादे से घूरना, पीछा करना, रास्ता रोकना, या ‘गुड टच-बैड टच’ भी अपराध की श्रेणी में आते हैं। यदि किसी बालिका के साथ शोषण होता है, तो उसे तुरंत अपने किसी विश्वसनीय व्यक्ति जैसे शिक्षक या परिवार के सदस्य को बताना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति यह जानने के बाद भी सहयोग नहीं करता है, तो उस पर भी कार्रवाई हो सकती है।

जानकारी छुपाना भी है अपराध

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि यौन शोषण की घटना को समाज या परिवार के डर से छिपाना भी अपराध है। ऐसे में कई लड़कियाँ चुपचाप पीड़ा सहती रहती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन को खतरा हो सकता है। उन्हें सलाह दी गई कि वे ऐसी स्थिति में बच्चे को अस्पतालों के ‘पालना केंद्र’ में छोड़ सकती हैं या बाल कल्याण समिति से संपर्क कर सकती हैं। ऐसे मामलों में नाबालिग बच्चियों की पहचान गोपनीय रखी जाती है।

हेल्पलाइन नंबर और सजा का प्रावधान

अधिकारियों ने बताया कि ऐसे अपराधों की जानकारी चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098, महिला हेल्पलाइन नंबर 181 और इमरजेंसी नंबर 118 पर दी जा सकती है। इस एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

इस जागरूकता कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक, सखी सेंटर के समन्वयक, चाइल्ड लाइन के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।