रायपुर, 07 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष हरीश देवांगन ने एक बयान में कहा कि ‘स्वस्थ भारत’ के निर्माण के लिए शारीरिक शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में अनिवार्य करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज के रासायनिक युग में मनुष्य को सबसे ज़्यादा संघर्ष अपने स्वास्थ्य के लिए करना पड़ रहा है, और यह चिंता का विषय है कि युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
जीवनशैली में बदलाव और पारंपरिक खेलों का महत्व:
देवांगन ने भारतीय इतिहास में गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ शिष्यों को शारीरिक शिक्षा के साथ-साथ जीवन के हर पहलू में निपुण बनाया जाता था। उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली और पाश्चात्य प्रभाव के कारण हमारी ग्रामीण परंपराएँ और पारंपरिक खेल जैसे कबड्डी, खो-खो, रेस टीप, रिंग बांदा आदि लुप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण युवा मोबाइल की दुनिया में कैद हो रहे हैं।
शारीरिक शिक्षा को प्राथमिक स्तर से अनिवार्य करने की माँग:
हरीश देवांगन ने कहा कि एक राष्ट्र महान इसलिए नहीं बनता कि उसकी व्यवस्था क्या है, बल्कि वह अपने नागरिकों के सामूहिक प्रयास, जीवनशैली और विचारों से महान बनता है। उन्होंने जोर दिया कि जिस तरह शरीर को पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है, उसी तरह हर व्यक्ति को शारीरिक स्वास्थ्य की आवश्यकता है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि प्राथमिक स्तर से ही शारीरिक शिक्षा को एक अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया जाए, ताकि बच्चे बचपन से ही मैदान में पसीना बहाकर स्वस्थ शरीर का निर्माण कर सकें। उनका मानना है कि शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य करके ही हम भारत को एक स्वस्थ राष्ट्र बना सकते हैं।

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