रायपुर – छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) एक बार फिर विवादों में है। सरकारी अस्पतालों में घटिया और नकली दवाइयों की आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हाल ही में, निगम ने अपने रायपुर स्थित वेयरहाउस से कई दवाइयों को वापस लेने का आदेश जारी किया है, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर चिंता बढ़ गई है।
घटिया पैरासिटामोल और अन्य दवाइयां वापस
निगम ने अपने नवीनतम आदेश में तीन प्रमुख दवाइयों के उपयोग और वितरण पर रोक लगा दी है। इनमें पैरासिटामोल 650mg और 500mg और एसेक्लोफेनाक (Aceclofenac) के कुछ बैच शामिल हैं। इन दवाइयों को राज्य के सभी अस्पतालों से तुरंत वापस लेने का निर्देश दिया गया है। यह सामने आया है कि ये दवाइयां 2023-24 में बनी थीं और इनकी एक्सपायरी डेट नजदीक थी। यह भी संदेह है कि निगम ने जानबूझकर दवाइयों को वापस मंगाने में देरी की, ताकि अधिकांश स्टॉक मरीजों द्वारा उपयोग कर लिया जाए और निर्माता कंपनियों पर स्टॉक रिकॉल या जुर्माना न लगे।
स्वास्थ्य विभाग पर सवालों के घेरे में
इससे पहले भी, 30 जुलाई को निगम ने कई अन्य दवाइयों और सर्जिकल उपकरणों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। इनमें सर्जिकल ग्लव्स और कुछ इंजेक्शन शामिल थे। यह लगातार सामने आ रही अनियमितताएं छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार पर हमला बोला है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। यह देखना होगा कि सरकार इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाती है।

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