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छत्तीसगढ़ी गीत “हरेली आगे” में हरेली पर्व का उल्लास और सांस्कृतिक महत्व

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रायपुर, 24 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण कृषि पर्व हरेली, जिसे ‘हरेली तिहार’ के नाम से भी जाना जाता है, अब एक नए छत्तीसगढ़ी गीत “हरेली आगे” के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक छटा बिखेर रहा है। यह गीत हरेली पर्व के विभिन्न पहलुओं और इससे जुड़ी प्राकृतिक सुंदरता को बड़े ही मनमोहक ढंग से प्रस्तुत करता है।

यह गीत हरेली को छत्तीसगढ़ का एक “पवित्र त्योहार” बताता है, जो इस पर्व के गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है। गाने में धरती की हरियाली और खेतों में लहराते हल का उल्लेख है, जो इस कृषि प्रधान त्योहार के मूल विषय को उजागर करता है।

“हरेली आगे” गीत में धान के पकने की सुगंध का भी जिक्र है, जो अच्छी फसल और समृद्धि का प्रतीक है। इसके साथ ही, नदियों की मधुर ध्वनि और जीवंत “झूमर” नृत्य का वर्णन त्योहार के उल्लासपूर्ण माहौल को दर्शाता है। गीत में “धाई के लुगरा” (साड़ी) जैसे पारंपरिक परिधानों का भी उल्लेख है, जो छत्तीसगढ़ी संस्कृति की पहचान हैं।

कुल मिलाकर, यह गीत छत्तीसगढ़ में हरेली पर्व से जुड़े आनंद, सांस्कृतिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता को प्रभावी ढंग से व्यक्त करता है, जिससे यह त्योहार और भी जीवंत और आकर्षक बन जाता है।

आप इस गीत को इस लिंक पर देख सकते हैं: https://www.youtube.com/watch?v=L3G2PMjt5O4