राजधानी रायपुर के शांति नगर स्थित विमतारा हॉल में आयोजित प्रदेश स्तरीय ‘समाज गौरव सम्मान समारोह 2026’ सम्मान, संस्कृति और सामाजिक चेतना का एक ऐतिहासिक और भव्य संगम बनकर उभरा। सृजन भूमि छत्तीसगढ़ दैनिक समाचार पत्र एवं छत्तीसगढ़ जन जागृति लोक कलाकार सांस्कृतिक समिति/कलाकार एसोसिएशन संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में छत्तीसगढ़ की वास्तविक धरोहरों को एक साझा मंच प्रदान किया गया। इस महाकुंभ में प्रदेश के विभिन्न कोनों से आए समाजसेवियों, लोक कलाकारों, कर्मठ पत्रकारों, समर्पित शिक्षकों, प्रखर साहित्यकारों एवं सांस्कृतिक कर्मियों की उपस्थिति ने राजधानी को सांस्कृतिक आभा से सराबोर कर दिया।


ज्ञान और संस्कृति के दीप से अनुष्ठान का आगाज़
समारोह का शुभारंभ सनातन और छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुरूप मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं ज्योति कलश पूजन के साथ हुआ। इस मांगलिक अनुष्ठान का नेतृत्व कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार व आयोजक एवं संपादक प्रीतलाल कुर्रे तथा छत्तीसगढ़ी कला जगत के जाने-माने निर्माता-निर्देशक, अभिनेता, लेखक एवं लोकगायक विनोद बर्मन ने किया। उपस्थित अतिथियों ने ज्ञान, कला और सामाजिक चेतना के दीप प्रज्वलित कर समाज के उत्थान और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया।
दिग्गज विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात समाजसेवी एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. चंद्रशेखर खरे ने की। मंच पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रदेश की कई गणमान्य हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनका स्वागत पारंपरिक रूप से पुष्पगुच्छ, श्रीफल एवं अंगवस्त्र भेंट कर किया गया:
डॉ. चंद्रशेखर खरे – अध्यक्ष, प्रख्यात समाजसेवी एवं शिक्षाविद्।
अतिथि गण – डॉ. भूपेंद्र गिलहरे, डॉ. छन्नूलाल बंजारे, आशीष कंठले, भागवत भारती और इंजीनियर सुरेश कुमार बंजारे।
कला एवं प्रशासन जगत – प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक डॉ. पुनीत सोनकर, डॉ. टेकराम साहू और महेंद्र कुमार कंठले।
प्रतिष्ठित चेहरे – राज्य पुरस्कार से सम्मानित डॉ. खम्हन दास भास्कर एवं मोहन दास बंजारे।

“प्रतिभाओं का सम्मान समाज की सकारात्मक परंपरा” – डॉ. खरे
अपने सारगर्भित अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. चंद्रशेखर खरे ने प्रतिभा सम्मान के महत्व को प्रतिपादित किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति निःस्वार्थ भाव से समाज की सेवा में लगे हैं या अपनी कला और ज्ञान से समाज को संवार रहे हैं, वे हमारी वास्तविक धरोहर हैं।
“प्रतिभाओं और समाजहित में कार्य करने वाले अग्रदूतों का सम्मान करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जीवंत और सकारात्मक सामाजिक परंपरा है। ऐसे आयोजनों से हमारी नई पीढ़ी को जीवन में कुछ बेहतर और अनुकरणीय करने की प्रेरणा मिलती है।”
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: पंडवानी की गूंज और लोक कला का जादू
इस महाकुंभ का मुख्य आकर्षण छत्तीसगढ़ की माटी की सुंधाधर्मी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
ओजस्वी पंडवानी: सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका कुमारी टिकेश्वरी साहू एवं कुमारी योगेश्वरी सेन ने अपनी शौर्य और वीरता से ओतप्रोत ओजस्वी प्रस्तुति से पूरे विमतारा हॉल को तालियों की गूंज से भर दिया।
लोक विधाओं का समागम: कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए पारंपरिक लोकगीतों, करमा-ददरिया जैसे लोकनृत्यों ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की प्राचीन वैभवता और जीवंतता की अनुपम झलक प्रस्तुत की।
सैकड़ों प्रतिभाओं को मिला ‘समाज गौरव सम्मान 2026’
समारोह के मुख्य चरण में छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आई उन अनसुनी और स्थापित प्रतिभाओं को मंच पर गौरव प्रदान किया गया, जिन्होंने समाज के निर्माण में मूक रहकर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अलग-अलग क्षेत्रों के चयनित उत्कृष्ट प्रतिभागियों को ‘समाज गौरव सम्मान 2026’, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) एवं श्रीफल प्रदान कर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया।


सम्मानित विधाएं और क्षेत्र:
समाज सेवा एवं कल्याण: ग्रामीण अंचलों में सामाजिक चेतना जगाने वाले कार्यकर्ता।
पत्रकारिता एवं निष्पक्ष लेखन: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में समाज की आवाज उठाने वाले पत्रकार।
शिक्षा एवं साहित्य: ज्ञान की अलख जगाने वाले शिक्षक और नई दिशा देने वाले साहित्यकार।
लोककला, संगीत एवं संस्कृति: छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विधाओं को जीवित रखने वाले लोक कलाकार।
सकारात्मक बदलाव का संकल्प और आभार
आयोजक प्रीतलाल कुर्रे एवं विनोद बर्मन ने इस सफल आयोजन के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस आयोजन की परिकल्पना समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले चेहरों को एक राष्ट्रीय-प्रांतीय पहचान देने के लिए की गई थी। कार्यक्रम की सफलता से उत्साहित आयोजकों ने संकल्प दोहराया कि भविष्य में भी शिक्षा, कला, साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली छिपी हुई प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें सम्मानित करने का यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा।
कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों, सुदूर जिलों से आए प्रतिभागियों, मीडिया कर्मियों और सहयोगकर्ताओं के प्रति भावभीना आभार व्यक्त किया गया। सौहार्द, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गौरव और कृतज्ञता की भावना से ओतप्रोत यह भव्य आयोजन छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक अविस्मरणीय और प्रेरणादायी अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।

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