आरंग, 15 जनवरी 2026 – छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी आरंग एक नई सांस्कृतिक चेतना की गवाह बनने जा रही है। क्षेत्रीय विधायक और कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के विजन और कुशल नेतृत्व में दो दिवसीय ‘राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव’ का ऐतिहासिक शुभारंभ हो रहा है। यह आयोजन आरंग की प्राचीन विरासत, त्याग और धर्म की गाथा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ‘सांस्कृतिक मील का पत्थर’ माना जा रहा है।



महोत्सव का भव्य आगाज: पहले दिन के आकर्षण
महोत्सव के पहले दिन (15 जनवरी) कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति और कला के संगम के साथ होगी:
रेत कला (Sand Art): प्रातः काल विख्यात रेत कलाकार हेमचंद साहू द्वारा महोत्सव स्थल पर राजा मोरध्वज की आकर्षक कलाकृति बनाई जाएगी।
भव्य शोभायात्रा: चंडी मंदिर से बाबा बागेश्वरनाथ एवं वेद माता गायत्री की शोभायात्रा निकलेगी, जो नगर भ्रमण और जलाभिषेक के बाद इंडोर स्टेडियम पहुंचेगी।
सुनील सोनी की सुरीली शाम: रात्रि 9 बजे छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध लोक गायक सुनील सोनी अपनी प्रस्तुति से समां बांधेंगे।
बौद्धिक विमर्श: शाम को इतिहासकारों और शिक्षाविदों (आनंद राम साहू, प्रो. आर.एन. विश्वकर्मा आदि) द्वारा आरंग के गौरवशाली इतिहास पर व्याख्यान दिया जाएगा।
द्वितीय दिवस: डॉ. कुमार विश्वास और मुख्यमंत्री का आगमन
16 जनवरी को महोत्सव का समापन समारोह और भी भव्य होगा:
मुख्य अतिथि: प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय समापन समारोह की शोभा बढ़ाएंगे।
विशिष्ट उपस्थिति: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा और प्रदेश का पूरा मंत्रिमंडल इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनेगा।
काव्य संध्या: महोत्सव का मुख्य आकर्षण देश के प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास का काव्य पाठ होगा, जो रात्रि 8 बजे से शुरू होगा।
विशिष्ट अतिथियों की सूची
मुख्य अतिथि श्री विष्णु देव साय (मुख्यमंत्री)
अध्यक्षता डॉ. रमन सिंह (विधानसभा अध्यक्ष)
अतिविशिष्ट अतिथि अरुण साव, विजय शर्मा (उपमुख्यमंत्री)
संयोजक/मार्गदर्शक गुरु खुशवंत साहेब (कैबिनेट मंत्री)
विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा, ओ.पी. चौधरी, बृजमोहन अग्रवाल (सांसद) एवं अन्य
गुरु खुशवंत साहेब का विजन: विरासत का संरक्षण
कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने आरंग की उस पहचान को पुनः जीवित किया है जिसमें मांडदेवल जैन मंदिर, बाबा बागेश्वरनाथ धाम, भंडारपुरी धाम (गुरु घासीदास बाबा की कर्मस्थली) और माता कौशल्या की नगरी का गौरव शामिल है।
मंत्री जी ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि:
“यह महोत्सव केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि आरंग के हर नागरिक के सम्मान का उत्सव है। आइए, हम सब मिलकर आरंग की इस गौरवगाथा को विश्व पटल पर स्थापित करें।”

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