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छत्तीसगढ़ विधानसभा मॉनसून सत्र: पहले दिन खाद की कमी पर हंगामा, विपक्ष के 22 विधायक निलंबित

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रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मॉनसून सत्र 2025 का आगाज सोमवार, 14 जुलाई को भारी हंगामे के साथ हुआ। सत्र के पहले दिन ही किसानों को खाद की कथित कमी के मुद्दे पर सियासी पारा गरमा गया और विपक्ष के 22 विधायकों को स्वतः निलंबित कर दिया गया, हालांकि बाद में निलंबन वापस ले लिया गया।

सत्र के पहले दिन विपक्ष ने राज्य में खाद की कमी का आरोप लगाते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के वक्तव्य के बाद भी आसंदी ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे नाराज विपक्षी विधायक नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। विवाद बढ़ने पर विपक्ष के 22 विधायक स्वतः निलंबित हो गए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बाद में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर इन विधायकों का निलंबन वापस ले लिया। निलंबित विधायक विधानसभा परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर भी बैठे और सरकार पर किसानों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया।

नेता प्रतिपक्ष ने उठाया मुद्दा:

शून्यकाल के दौरान, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने खाद की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूरे राज्य में किसानों को खाद नहीं मिल रही है और वे दर-दर भटक रहे हैं, जबकि बाजार में पर्याप्त मात्रा में खाद बिक रही है। उन्होंने सरकार पर किसानों की फसल कम करवाने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया और सवाल किया कि संकट की आशंका पहले से होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री का जवाब:

जवाब में, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने खाद की कमी से इनकार किया। उन्होंने बताया कि किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग और वैकल्पिक खाद के प्रशिक्षण के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अप्रैल से ही खाद भंडारण की तैयारी शुरू कर दी थी और नैनो उर्वरकों का भी पर्याप्त भंडारण किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में रासायनिक खाद की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि डीएपी खाद के आयात में वैश्विक कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने नैनो डीएपी, एनपीके और और एसएसपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था की है, जिससे किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है।

मॉनसून सत्र के दूसरे दिन भी सवाल-जवाब का सिलसिला दिनभर चलता रहा, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी रही।